
भाई साहब दूसरी ओर से जाइये। प्लीज, आप यहां मत खड़े हों…। जी हां, इसे आम आदमी पार्टी का असर ही कहेंगे कि शपथ ग्रहण समारोह में दिल्ली पुलिस गांधीगिरी करती नजर आई।
कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच पुलिसकर्मी समारोह में आए लोगों से नियमों का पालन करने की गुजारिश करते दिखे। उम्मीद जताई गई थी समारोह का गवाह बनने के लिए एक लाख से अधिक लोग रामलीला मैदान में आएंगे और हुआ भी ऐसा ही। समारोह के लिए पुलिस ने अभूतपूर्व इंतजाम किए थे।
पुलिस के अलावा सुरक्षा बल चप्पे-चप्पे पर तैनात थे। आसपास की सभी ऊंची इमारतों पर पुलिसकर्मी दूरबीन से रामलीला मैदान पर नजर रखे हुए थे।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि शनिवार तड़के से ही पुलिसकर्मियों ने मैदान को घेर रखा था। समारोह में जाने वालों की जांच के लिए हर गेट पर मेटल डिटेक्टर लगे थे।
तलाशी लिए बिना किसी को भी अंदर नहीं जाने दिया जा रहा था। पुलिस ने बीड़ी-सिगरेट, बैग व अन्य संदिग्ध वस्तुओं को मैदान में ले जाने की इजाजत नहीं दी।
मैदान के अंदर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में दिल्ली पुलिस के जवान बिना डंडे के मौजूद थे। वह लाउड स्पीकर के जरिए लोगों से अनुरोध कर नियमों का पालन करने की गुजारिश कर रहे थे।
सड़क पर भी भीड़ को एकत्र नहीं होने दिया जा रहा था। मैदान से बाहर थोड़ी-थोड़ी दूर पर पीसीआर, कैट्स एंबुलेंस, दमकल वाहन, वाटर कैनन की व्यवस्था की गई थी।
मध्य, नई दिल्ली समेत कई जिलों के पुलिस उपायुक्तों ने सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाल रखी थी। समारोह से पूर्व करीब 10:30 बजे रामलीला मैदान के आसपास वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। समारोह खत्म होने के बाद करीब 1:15 बजे मार्ग खोला गया।
नहीं सुनाई दी सायरन की आवाज
केजरीवाल के सुरक्षा व लाल बत्ती की गाड़ी न लेने का असर शनिवार को समारोह के दौरान भी दिखा।
आम तौर पर छोटे से समारोह में जब मुख्यमंत्री या कोई अन्य वीवीआईपी पंहुचता है तो उनकी गाडियों व सुरक्षा कर्मियों की गाड़ियों में लगे सायरन से पूरा इलाका गूंज उठता है, लेकिन शनिवार को उपराज्यपाल समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं के पहुंचने के बावजूद सायरन की आवाज सुनाई नहीं दी।
